बुधवार, 23 मई 2012

इसी दुनिया में



मेरे लिए
मेरी दुनिया वही है
जो है ठीक सामने मेरे
यानी वो दुनिया
जो ठीक पीछे है
तुम्हारी पीठ के

...और तुम्हारे लिए
मेरी पीठ कि दुनिया
तुम्हारी दुनिया है

तुम ठीक सामने हो मेरे
अपनी दुनिया के भीतर
और मै हूँ
अपनी दुनिया के भीतर

इस तरह
अपनी-अपनी दुनियाओं में
या यूँ कहें
कि इक-दूजे कि दुनियाओं में
खड़े-खड़े हम
कर रहे है परिभाषित इक-दूजे को
मिला रहे है हाथ
अपनी-अपनी दुनियाओं के प्रतिनिधि की तरह

...और हमसे थोड़ी ही दूर
एक तीसरी दुनियां में खड़ा कोई
हंस रहा है हम पर
किस कदर
देखो न!


4 टिप्‍पणियां:

  1. बढिया भाव हैं,उम्दा अभिव्यक्ति। कृपया "हंस" को "हँस" कर लें :)

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  2. तीसरी दुनिया वाले को ही पूरा आनन्द आता है..

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